जेम पोर्टल इंडिया में Q1, Q2, Q3, Q4 Category क्या है? GeM Portal (Government e-Marketplace) भारत सरकार का एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ सरकारी विभाग और एजेंसियाँ सामान और सेवाओं की खरीददारी करते हैं। GeM पर सामान और सेवाओं को उनकी गुणवत्ता (Quality) और प्रकार (Type) के आधार पर Q1, Q2, Q3, Q4, Q5, Q6 श्रेणियों में बांटा गया है। नीचे इन सभी श्रेणियों का विवरण और इनमें किस प्रकार के उत्पाद (Product) डाले जा सकते हैं, हिंदी में बताया गया है: 🔹 Q1 Category– प्रीमियम गुणवत्ता (Premium Quality):- उच्च तकनीकी मानक वाले उत्पाद। रक्षा, अनुसंधान, मेडिकल और तकनीकी विभागों में उपयोग होते हैं। ✅ उदाहरण: उन्नत लैपटॉप, मेडिकल उपकरण, उच्च गुणवत्ता वाले सर्वर, डिफेन्स उपकरण। 🔹 Q2 Category – उच्च गुणवत्ता (High Quality) Q1 से थोड़ा कम लेकिन फिर भी अच्छी तकनीकी विशेषताओं वाले उत्पाद। ✅ उदाहरण: अच्छे ब्रांड के प्रिंटर, नेटवर्क डिवाइस, कार्यालय के लिए बेहतर फर्नीचर। 🔹 Q3 Category– सामान्य गुणवत्ता (Standard Quality) औसत गुणवत्ता के उत्पाद, जिनका उपयोग सरकारी कार्यालयों में आमतौर पर होता है। ✅ उदाहरण: कुर्सियाँ, टेबल, बेसिक कंप्यूटर, स्टेशनरी आइटम, UPS। 🔹 Q4 Category– बुनियादी गुणवत्ता (Basic Quality) सबसे साधारण और किफायती उत्पाद। बड़े पैमाने पर खरीदारी के लिए उपयुक्त। ✅ उदाहरण: बेसिक फर्नीचर, सस्ते इलेक्ट्रॉनिक्स, पंखे, बल्ब। 🔹 Q5 Category – कस्टम उत्पाद (Custom Products) ऐसे उत्पाद या सेवाएं जो ग्राहक (Buyer) की ज़रूरत के अनुसार बनाए जाते हैं। ✅ उदाहरण: कस्टम सॉफ्टवेयर, विशेष प्रकार की वर्दियाँ, डिज़ाइन सेवाएं। 🔹 Q6 Category – सेवाएं (Services) इसमें उत्पाद नहीं बल्कि सेवाएं आती हैं। ✅ उदाहरण: सफाई सेवाएं, सुरक्षा गार्ड, डेटा एंट्री, IT सेवा, ईवेंट मैनेजमेंट, बिजली मिस्त्री सेवा। 📌 आप कौन-कौन से उत्पाद इन श्रेणियों में जोड़ सकते हैं? श्रेणी आप क्या जोड़ सकते हैं? Q1 मेडिकल उपकरण, उच्च गुणवत्ता वाले कंप्यूटर, सुरक्षा उपकरण Q2 ब्रांडेड प्रिंटर, नेटवर्क उपकरण, हाई क्वालिटी फर्नीचर Q3 टेबल, कुर्सियाँ, सामान्य कंप्यूटर, UPS, स्टेशनरी Q4 किफायती फर्नीचर, पंखा, बल्ब, प्लास्टिक कुर्सी Q5 ग्राहक की मांग पर बनाए गए उत्पाद (custom uniforms, special tools) Q6 सफाई, चौकीदार, IT support, बिजली मिस्त्री, माली, ड्राइवर आदि अंत मे, आशा है की पूरी पोस्ट पढ़ने के बाद आपको GeM Portal मे दी गई Q1 Q2 Q3 Category के बारे मे जानकारी मिल गई होगी?
उत्तर प्रदेश नि:शुल्क शिक्षा (RTE) योजना क्या है?
RTE योजना उत्तर प्रदेश नि: शुल्क शिक्षा (RTE) योजना राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को केजी से स्नातक तक नि: शुल्क शिक्षा प्रदान करना है। RTE योजना के प्रमुख बिंदु:- लाभार्थी: उत्तर प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्र। आयु सीमा: 6 से 24 वर्ष के बीच के छात्र। शिक्षा स्तर: केजी से लेकर स्नातक तक नि: शुल्क शिक्षा। लाभ: शिक्षा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, जिससे छात्रों को वित्तीय बोझ से मुक्ति मिलेगी और शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन मिलेगा। RTE योजना आवश्यक दस्तावेज़ आधार कार्ड जन्म प्रमाण पत्र राशन कार्ड मोबाइल नंबर पैन कार्ड जाति प्रमाण पत्र आवास प्रमाण पत्र आय प्रमाण पत्र ईमेल पता RTE योजना आवेदन प्रक्रिया (Admission Process) RTE (Right to Education) अधिनियम: इसके तहत निजी स्कूलों में 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। अटल आवासीय विद्यालय योजना: यह योजना निर्माण श्रमिकों के बच्चों को 6 से 16 वर्ष की आयु में नि: शुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान करती है। यदि आप उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और उपरोक्त पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं, तो आप इस योजना का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। RTE बच्चों को विद्यालय से क्या-क्या फ्री मिलता है? RTE (Right to Education) अधिनियम के तहत, 6 से 14 वर्ष की आयु के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित वर्ग (DG) के बच्चों को निजी स्कूलों में कक्षा 8 तक निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत चयनित बच्चों को निम्नलिखित सुविधाएं मुफ्त में मिलती हैं: 📚 मुफ्त सुविधाएं निशुल्क शिक्षा: प्राइवेट स्कूलों में ट्यूशन फीस सहित सभी शैक्षणिक शुल्क सरकार द्वारा वहन किए जाते हैं। पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म: बच्चों को किताबें और दो सेट यूनिफॉर्म मुफ्त में उपलब्ध कराए जाते हैं। कुछ राज्यों में इसके लिए ₹5,000 की राशि सीधे अभिभावकों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। अन्य शुल्कों से छूट: स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे RTE के तहत नामांकित बच्चों से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क, जैसे परीक्षा शुल्क या गतिविधि शुल्क, न लें। 📝 ध्यान देने योग्य बातें 25% आरक्षण: प्रत्येक निजी स्कूल में 25% सीटें RTE के तहत आरक्षित होती हैं। लॉटरी प्रणाली: चयन प्रक्रिया लॉटरी के माध्यम से होती है, जिससे सभी पात्र बच्चों को समान अवसर मिलता है। आयु सीमा: प्रवेश के लिए आयु सीमा निर्धारित होती है, जैसे पहली कक्षा के लिए 6 से 7 वर्ष। आवेदन प्रक्रिया: उत्तर प्रदेश में आवेदन के लिए आधिकारिक वेबसाइट rte25.upsdc.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है। यदि आपके बच्चे का चयन RTE के तहत हुआ है और स्कूल आपसे किसी भी प्रकार का शुल्क मांग रहा है, तो आप संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (BSA) से संपर्क कर सकते हैं और शिकायत दर्ज करा सकते हैं। RTE Admission Eligibility क्या है? RTE (Right to Education) अधिनियम के तहत एडमिशन पाने के लिए कुछ निर्धारित पात्रता (Eligibility Criteria) होती हैं। नीचे विस्तार से बताया गया है कि कौन-कौन RTE के तहत आवेदन कर सकता है: ✅ RTE एडमिशन पात्रता (Eligibility Criteria) आयु सीमा (Age Limit) नर्सरी / LKG / पहली कक्षा के लिए: बच्चे की आयु 3 वर्ष से 7 वर्ष के बीच होनी चाहिए (राज्य के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है)। उदाहरण: LKG: 3.5 से 5 वर्ष कक्षा 1: 6 से 7 वर्ष आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति (EWS / DG वर्ग) बच्चा निम्न में से किसी एक श्रेणी में आता हो: EWS (Economically Weaker Section) – आय: आमतौर पर सालाना पारिवारिक आय ₹1 लाख से ₹2 लाख तक (राज्य सरकार के अनुसार अलग हो सकती है)। DG (Disadvantaged Group) में शामिल हैं: अनुसूचित जाति (SC) अनुसूचित जनजाति (ST) अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC – कुछ राज्यों में मान्य) दिव्यांग (Specially Abled Children) HIV प्रभावित / अनाथ बच्चे / बाल मज़दूरी से मुक्त बच्चे ट्रांसजेंडर बच्चे निवास स्थान (Residential Location Criteria) आवेदक बच्चे का निवास चयनित स्कूल के 1 से 3 किलोमीटर की सीमा में होना चाहिए। यह प्रमाण के लिए रिहायशी प्रमाण पत्र देना आवश्यक होता है (जैसे राशन कार्ड, आधार कार्ड, बिजली बिल आदि)। 🧾 जरूरी दस्तावेज (Required Documents) जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) निवास प्रमाण पत्र (Residential Proof) आय प्रमाण पत्र (Income Certificate – EWS के लिए) जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate – SC/ST/OBC के लिए) दिव्यांग प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) आधार कार्ड (बच्चे और माता-पिता का) पासपोर्ट साइज फोटो यदि आप आगामी सत्र के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो आप rte25.upsdc.gov.in पर जाकर नवीनतम जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
वसूली प्रमाण पत्र क्या होता है?
वसूली प्रमाण पत्र (Recovery Certificate) एक कानूनी दस्तावेज़ होता है जिसे किसी अधिकृत संस्था, जैसे कि बैंक, वित्तीय संस्था या सरकारी विभाग, द्वारा जारी किया जाता है जब कोई उधारकर्ता (loan defaulter) ऋण (loan) चुकाने में विफल रहता है। यह प्रमाण पत्र ऋण की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देता है। वसूली प्रमाण पत्र की पूरी जानकारी: 📌 1. वसूली प्रमाण पत्र क्या है? यह एक कानूनी आदेश होता है जो कर्जदाता को अपने बकाया ऋण की वसूली के लिए अदालत या अधिकृत प्राधिकरण (जैसे DRT – Debt Recovery Tribunal) से मिलता है। यह प्रमाणित करता है कि उधारकर्ता पर कितना बकाया है और उसे कानून के अनुसार वसूला जा सकता है। 📌 2. वसूली प्रमाण पत्र कौन जारी करता है? बैंक या वित्तीय संस्थान जब किसी उधारकर्ता से ऋण वसूल नहीं कर पाते, तो वे मामला ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) में ले जाते हैं। DRT उधारकर्ता को नोटिस भेजकर सुनवाई करता है। यदि यह सिद्ध हो जाता है कि उधारकर्ता ने ऋण नहीं चुकाया है, तो DRT वसूली प्रमाण पत्र जारी करता है। 📌 3. वसूली प्रमाण पत्र में क्या होता है? उधारकर्ता का नाम कुल बकाया राशि (मुख्यधन + ब्याज) चुकाने की अंतिम तिथि (यदि दी जाए) बैंक या संस्था का नाम वसूली के आदेश 📌 4. वसूली प्रमाण पत्र मिलने के बाद क्या होता है? बैंक / संस्था वसूली प्रमाण पत्र के आधार पर: उधारकर्ता की संपत्ति जब्त कर सकती है नीलामी (Auction) करवा सकती है तनख्वाह या बैंक खाता सीज़ करवाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है 📌 5. क्या उधारकर्ता वसूली प्रमाण पत्र को चुनौती दे सकता है? हाँ, उधारकर्ता DRT के आदेश के खिलाफ DRAT (Debt Recovery Appellate Tribunal) में अपील कर सकता है। लेकिन अपील के लिए आमतौर पर कुछ प्रतिशत राशि जमा करनी पड़ती है। 📌 6. वसूली प्रमाण पत्र की वैधता (Validity): आमतौर पर वसूली प्रमाण पत्र की वैधता 12 वर्ष तक होती है। इस अवधि में वसूली की प्रक्रिया पूरी करनी होती है, अन्यथा प्रमाण पत्र की वैधता समाप्त हो सकती है। 🧾 निष्कर्ष: वसूली प्रमाण पत्र एक शक्तिशाली कानूनी दस्तावेज है जिससे बैंक या संस्था कर्ज की वसूली के लिए कानूनी बल का उपयोग कर सकती है। यह ऋण न चुकाने वालों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम होता है।
जाने उत्तर प्रदेश मे मकान बनवाने के लिए PMAY सब्सिडी कैसे प्राप्त करे?
PMAY सब्सिडी का लाभ कैसे लिया जाए? उत्तर प्रदेश में मकान बनवाने के लिए सरकारी सब्सिडी प्राप्त करने के लिए आप प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। नीचे इन योजनाओं की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया दी गई है: 🏠 प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) – क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) PMAY-CLSS के तहत होम लोन पर ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे घर बनाना या खरीदना अधिक किफायती हो जाता है। ✅ प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) पात्रता मानदंड (Eligibilty) आय वर्ग: EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग): वार्षिक आय ₹3 लाख तक LIG (निम्न आय वर्ग): ₹3 लाख से ₹6 लाख तक MIG-I: ₹6 लाख से ₹12 लाख तक MIG-II: ₹12 लाख से ₹18 लाख तक घर का स्वामित्व: आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम पर भारत में कोई पक्का मकान नहीं होना चाहिए। महिला स्वामित्व: EWS और LIG वर्ग के लिए, घर महिला के नाम पर या संयुक्त स्वामित्व में होना चाहिए। पहली बार लाभ: आवेदक ने पहले किसी सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं लिया होना चाहिए। 💰 प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) सब्सिडी विवरण EWS/LIG: ₹6 लाख तक के लोन पर 6.5% ब्याज सब्सिडी; अधिकतम ₹2.67 लाख तक MIG-I: ₹9 लाख तक के लोन पर 4% ब्याज सब्सिडी; अधिकतम ₹2.35 लाख तक MIG-II: ₹12 लाख तक के लोन पर 3% ब्याज सब्सिडी; अधिकतम ₹2.30 लाख तक 📝प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY)आवेदन प्रक्रिया (Application Process) होम लोन आवेदन: किसी भी मान्यता प्राप्त बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से होम लोन के लिए आवेदन करें। CLSS के लिए आवेदन: लोन स्वीकृति के बाद, वही संस्था आपके लिए CLSS के तहत सब्सिडी का दावा करेगी। सब्सिडी वितरण: पात्रता की पुष्टि के बाद, सब्सिडी राशि सीधे आपके लोन खाते में जमा की जाएगी, जिससे आपकी मूल लोन राशि कम हो जाएगी। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद द्वारा सब्सिडी का लाभ कैसे लिया जाए? उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद (UPAVP) भी राज्य में किफायती आवास योजनाएं संचालित करती है। ✅ पात्रता मानदंड: नागरिकता: आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए। आयु: आवेदन के समय न्यूनतम 18 वर्ष की आयु होनी चाहिए। स्वामित्व: आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम पर उत्तर प्रदेश में कोई अन्य पक्का मकान या भूखंड नहीं होना चाहिए। आय सीमा: कुछ योजनाओं में आय सीमा निर्धारित हो सकती है; उदाहरण के लिए, कमजोर आय वर्ग के लिए वार्षिक आय ₹3 लाख तक होनी चाहिए। 📝उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद द्वारा सब्सिडी के लाभ हेतु आवेदन प्रक्रिया: आवेदन फॉर्म: UPAVP की आधिकारिक वेबसाइट upavp.in से आवेदन फॉर्म डाउनलोड करें या संबंधित कार्यालय से प्राप्त करें। फॉर्म भरना: आवश्यक विवरण भरें और मांगे गए दस्तावेज़ संलग्न करें। शुल्क भुगतान: पंजीकरण शुल्क निर्धारित बैंक में जमा करें। फॉर्म जमा करना: भरे हुए फॉर्म को संबंधित कार्यालय में जमा करें या पंजीकृत डाक द्वारा भेजें। 📄उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद हेतु सब्सिडी के लाभ लेने हेतु आवश्यक दस्तावेज़ आधार कार्ड आय प्रमाण पत्र निवास प्रमाण पत्र बैंक खाता विवरण पासपोर्ट साइज फोटो महिला स्वामित्व के लिए विवाह प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) यदि आप इन योजनाओं के तहत आवेदन करना चाहते हैं, तो संबंधित वेबसाइटों पर जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और आवेदन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। निष्कर्ष:- इस प्रकार से आप प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की योजनाओं का लाभ उठा कर मकान बनवाने के लिए PMAY सब्सिडी प्राप्त कर सकते है?
जाने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री पोर्टल पर किन-किन विभागों की शिकायत की जा सकती है?
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है। नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके आप अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं:- मुख्यमंत्री पोर्टल (CM Portal) पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर जाएं: https://cmhelpline.up.gov.in/ या https://jansunwai.up.nic.in/ शिकायत दर्ज करें (Register Grievance): होमपेज पर आपको “शिकायत दर्ज करें” या “Grievance Registration” का विकल्प मिलेगा, उस पर क्लिक करें। मोबाइल नंबर रजिस्टर करें: अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें। OTP के माध्यम से वेरिफिकेशन करें। शिकायत फॉर्म भरें: विभाग चुनें (जैसे: पुलिस, नगर निगम, बिजली विभाग आदि) जिला चुनें शिकायत का संक्षिप्त विवरण दें कोई दस्तावेज़ है तो उसे अपलोड करें शिकायत सबमिट करें: सभी जानकारी भरने के बाद “Submit” बटन पर क्लिक करें। आपको एक शिकायत संख्या (Grievance ID) मिलेगी, जिससे आप बाद में स्टेटस चेक कर सकते हैं। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की स्थिति (Status) कैसे देखें? मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की स्थिति देखने के लिए पोर्टल के होमपेज पर जाएं “शिकायत की स्थिति” या “Grievance Status” पर क्लिक करें अपनी शिकायत संख्या और मोबाइल नंबर डालें अब आप शिकायत का स्टेटस देख सकते हैं मुख्यमंत्री पोर्टल हेल्पलाइन नंबर CM Helpline: 1076 (24×7 कॉल सेंटर) मुख्यमंत्री पोर्टल पर किन-किन विभागों की शिकायत की जा सकती है? मुख्य रूप से लगभग 70+ विभाग पोर्टल से जुड़े हैं। इनमें शामिल हैं: 1. प्रशासनिक/सरकारी विभाग जिलाधिकारी कार्यालय (DM Office) पुलिस विभाग नगर निगम / नगर पंचायत / नगर पालिका ग्राम पंचायत / ब्लॉक विकास कार्यालय तहसील / राजस्व विभाग 2. कानून-व्यवस्था से जुड़े विभाग पुलिस विभाग (FIR, कार्यवाही न होना, भ्रष्टाचार) गृह विभाग न्याय विभाग 3. स्वास्थ्य और चिकित्सा विभाग: सरकारी अस्पताल स्वास्थ्य सेवा में लापरवाही आयुष्मान योजना से जुड़ी शिकायतें 4. शिक्षा विभाग: सरकारी स्कूल/कॉलेज में अनियमितता शिक्षक की अनुपस्थिति छात्रवृत्ति न मिलना आदि 5. ग्रामीण विकास / कृषि विभाग: मनरेगा से संबंधित शिकायतें सिंचाई, खाद, बीज की समस्या किसान सहायता योजनाएं 6. अन्य प्रमुख विभाग: बिजली विभाग (बिल गड़बड़ी, मीटर, लाइन आदि) जल निगम / जल आपूर्ति विभाग राशन कार्ड / खाद्य आपूर्ति विभाग समाज कल्याण विभाग श्रम विभाग आवास विकास विभाग परिवहन विभाग (RTO, ड्राइविंग लाइसेंस) पेंशन, विधवा/वृद्धा/दिव्यांग पेंशन दिव्यांग कल्याण महिला कल्याण विभाग मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत का निस्तारण कितने दिन में होता है? 👉 सामान्यत: शिकायतों का निस्तारण 15 से 30 कार्य दिवसों के भीतर किया जाता है। हालाँकि कुछ मामलों में, विशेषकर जब कई विभाग जुड़े हों, तो इसमें थोड़ा अधिक समय लग सकता है। ✅ पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद आपको एक संदर्भ संख्या (Grievance ID) मिलती है, जिससे आप नियमित रूप से अपनी शिकायत की स्थिति देख सकते हैं। अंत मे, इस प्रकार से हम मुख्यमंत्री पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कर उसका निस्तारण आसानी से करा सकते है?
हैसियत प्रमाण पत्र क्या होता है, इसे कैसे बनवाया जा सकता है और यह कहा काम आता है?
हैसियत प्रमाण पत्र (Income/Wealth Certificate) एक सरकारी दस्तावेज़ होता है जो किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति या संपत्ति की पुष्टि करता है। यह प्रमाण पत्र विभिन्न सरकारी योजनाओं, स्कूल/कॉलेज में दाखिले, ऋण आवेदन, या कोर्ट केस में आवश्यक हो सकता है। हैसियत प्रमाण पत्र क्या है? यह प्रमाण पत्र बताता है कि व्यक्ति के पास कितनी संपत्ति (जैसे ज़मीन, मकान, गाड़ी) है और उसकी वार्षिक आय कितनी है। इसे आमतौर पर तहसील या SDM कार्यालय द्वारा जारी किया जाता है। हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने हेतु पात्रता (Eligibility) आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए। आवेदक की स्थायी निवास स्थान की पुष्टि होनी चाहिए (स्थायी निवास प्रमाण पत्र आवश्यक होता है)। किसी विशेष योजना या ज़रूरत के लिए यह प्रमाण पत्र मांगा गया हो। हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने हेतु जरूरी दस्तावेज (Required Documents) आवेदन पत्र (सरकारी कार्यालय से प्राप्त या ऑनलाइन) पहचान प्रमाण पत्र (जैसे – आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर ID) पते का प्रमाण (जैसे – राशन कार्ड, बिजली बिल, निवास प्रमाण पत्र) जमीन/संपत्ति के दस्तावेज (खतौनी, नक्शा, रजिस्ट्री इत्यादि) बैंक स्टेटमेंट / आय स्रोत का विवरण पासपोर्ट साइज फोटो स्व-घोषणा पत्र (Self-declaration) यदि कोई कोर्ट केस या विशेष प्रयोजन है, तो उसका संबंधित दस्तावेज हैसियत प्रमाण पत्र के उपयोग (Use) सरकारी टेंडर भरने के लिए: कई बार सरकारी या निजी टेंडर में भाग लेने के लिए यह प्रमाण पत्र माँगा जाता है, ताकि आपकी आर्थिक क्षमता का आकलन हो सके। न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए: जैसे कि ज़मानत के दौरान, किसी केस में आर्थिक स्थिति बताने के लिए। बैंक लोन लेने के लिए: बैंक या वित्तीय संस्थाएं यह प्रमाण पत्र माँग सकती हैं ताकि आपकी आर्थिक स्थिति का पता चले। विज़ा आवेदन में: कुछ देशों में वीज़ा आवेदन के समय यह दिखाना होता है कि आपके पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन हैं। कॉर्पोरेट उपयोग: व्यापारिक साझेदारी या निवेश के समय आर्थिक हैसियत दिखाना ज़रूरी हो सकता है। हैसियत प्रमाण पत्र की वैधता (Validity) इसकी वैधता आमतौर पर 6 महीने से 1 वर्ष तक होती है, परंतु यह राज्य/संस्था के नियमों पर निर्भर करता है। यदि किसी विशेष संस्था ने इसकी अवधि निर्धारित की हो, तो उसी के अनुसार वैध माना जाएगा। उपयोग के समय यह देखना ज़रूरी है कि प्रमाण पत्र अपडेटेड हो और जारी करने की तिथि से निर्धारित समय के भीतर हो। हैसियत प्रमाण पत्र कैसे बनवाएं? (Step-by-step process) ऑफलाइन तरीका: अपने नजदीकी तहसील / SDM कार्यालय में जाएं। आवेदन पत्र लें या डाउनलोड करके भरें। सभी ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ आवेदन जमा करें। ज़रूरत पड़ने पर अधिकारियों द्वारा सत्यापन किया जाएगा (जैसे पटवारी द्वारा स्थल जांच)। प्रक्रिया पूरी होने के बाद 7-15 दिन में प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। ऑनलाइन तरीका : अपने राज्य की eDistrict / RTPS / Jan Seva Kendra वेबसाइट पर जाएं। “हैसियत प्रमाण पत्र” के लिए आवेदन विकल्प चुनें। फॉर्म भरें और दस्तावेज़ अपलोड करें। शुल्क (अगर कोई हो) ऑनलाइन जमा करें। आवेदन की रसीद और आवेदन नंबर प्राप्त करें। स्टेटस ऑनलाइन ट्रैक करें और प्रमाण पत्र डाउनलोड करें। शुल्क (Fees) कुछ राज्यों में यह निशुल्क होता है, जबकि कहीं-कहीं ₹10 से ₹50 तक शुल्क लिया जाता है। समय सीमा आमतौर पर 7 से 15 कार्य दिवस में प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। FAQ Section: हैसियत प्रमाण पत्र क्या होता है, कैसे बनवाएं और कहाँ काम आता है? Q1. हैसियत प्रमाण पत्र क्या होता है?हैसियत प्रमाण पत्र (Solvency Certificate) एक सरकारी दस्तावेज है जो किसी व्यक्ति या व्यवसाय की आर्थिक स्थिति (संपत्ति और वित्तीय क्षमता) को प्रमाणित करता है। यह बताता है कि संबंधित व्यक्ति की कुल संपत्ति या वित्तीय हैसियत कितनी है। Q2. हैसियत प्रमाण पत्र किसके द्वारा जारी किया जाता है?यह प्रमाण पत्र आमतौर पर जिला प्रशासन (जिलाधिकारी/SDM कार्यालय) द्वारा जारी किया जाता है। कुछ मामलों में बैंक भी सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट जारी करते हैं। Q3. हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?आम तौर पर निम्न दस्तावेज मांगे जाते हैं: आधार कार्ड / पहचान पत्र निवास प्रमाण पत्र जमीन/संपत्ति के कागजात बैंक स्टेटमेंट आय प्रमाण पत्र शपथ पत्र (Affidavit) पासपोर्ट साइज फोटो Q4. हैसियत प्रमाण पत्र कैसे बनवाया जा सकता है?आप अपने जिले के कलेक्ट्रेट या तहसील कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। कई राज्यों में यह सेवा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध है। आवेदन के बाद सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने पर प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। Q5. हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने में कितना समय लगता है?सामान्यतः 7 से 21 कार्य दिवस के अंदर प्रमाण पत्र जारी हो जाता है, लेकिन यह राज्य और प्रक्रिया पर निर्भर करता है। Q6. हैसियत प्रमाण पत्र कहाँ काम आता है?यह प्रमाण पत्र निम्न कार्यों में उपयोगी होता है: सरकारी ठेका (Tender) लेने में बैंक से लोन लेने में वीजा आवेदन के समय बड़ी वित्तीय डील या कॉन्ट्रैक्ट में कोर्ट या कानूनी मामलों में Q7. हैसियत प्रमाण पत्र की वैधता कितने समय तक होती है?आमतौर पर इसकी वैधता 6 महीने से 1 वर्ष तक होती है, लेकिन यह संबंधित विभाग के नियमों पर निर्भर करती है। Q8. क्या हैसियत प्रमाण पत्र ऑनलाइन डाउनलोड किया जा सकता है?यदि आपके राज्य में ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है, तो आवेदन स्वीकृत होने के बाद आप संबंधित सरकारी पोर्टल से इसे डाउनलोड कर सकते हैं।
Uttar Pradesh Scholarship Scheme Full Details in Hindi
Uttar Pradesh Scholarship Scheme – उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी शिक्षा बिना किसी आर्थिक बाधा के पूरी कर सकें। यह योजना विभिन्न स्तरों की शिक्षा के लिए उपलब्ध है, जिसमें प्री-मैट्रिक (कक्षा 9 और 10) और पोस्ट-मैट्रिक (कक्षा 11, 12 और उच्च शिक्षा) शामिल हैं। पात्रता मानदंड (Uttar Pradesh Scholarship Eligibility) आवासीय आवश्यकताएँ: आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए और राज्य के किसी मान्यता प्राप्त स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय में अध्ययनरत होना चाहिए। श्रेणी: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), सामान्य वर्ग, और अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, पारसी) के छात्र इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। आय सीमा: प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए: परिवार की वार्षिक आय ₹1 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए: परिवार की वार्षिक आय ₹2 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदन प्रक्रिया (Uttar Pradesh Scholarship Registration Process) पंजीकरण: उत्तर प्रदेश छात्रवृत्ति की आधिकारिक वेबसाइट scholarship.up.gov.in पर जाएं और अपनी श्रेणी के अनुसार पंजीकरण करें। लॉगिन: पंजीकरण के बाद प्राप्त रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड का उपयोग करके पोर्टल में लॉगिन करें। आवेदन पत्र भरें: आवश्यक व्यक्तिगत, शैक्षणिक और बैंक विवरण भरें। दस्तावेज़ अपलोड करें: आवश्यक दस्तावेज़ों की स्कैन की गई प्रतियां अपलोड करें, जैसे आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पिछले वर्ष की मार्कशीट, बैंक पासबुक की कॉपी आदि। आवेदन जमा करें: सभी विवरणों की जांच करें और आवेदन पत्र जमा करें। प्रिंटआउट लें: भविष्य के संदर्भ के लिए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट लें और अपने शैक्षणिक संस्थान में आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ जमा करें। महत्वपूर्ण निर्देश: आवेदन पत्र भरते समय सभी जानकारी सही और सत्यापित होनी चाहिए। आवेदन की प्रक्रिया एक सीमित समय के लिए खुली रहती है; इसलिए, निर्धारित समय अवधि में ही अपना आवेदन जमा करें। आवेदन पत्र जमा करने के बाद, अपने शैक्षणिक संस्थान से सत्यापन करवाना आवश्यक है। Uttar Pradesh Scholarship Form Status Cheking Process उत्तर प्रदेश छात्रवृत्ति (UP Scholarship) की स्थिति जानने के लिए आप निम्नलिखित चरणों का पालन कर सकते हैं: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: scholarship.up.gov.in पर विजिट करें। छात्र लॉगिन करें: होमपेज पर ‘छात्र’ (Student) सेक्शन पर क्लिक करें। अपने आवेदन के अनुसार ‘फ्रेश लॉगिन’ (Fresh Login) या ‘नवीनीकरण लॉगिन’ (Renewal Login) विकल्प चुनें। अपने कोर्स के अनुसार प्रासंगिक लिंक पर क्लिक करें। लॉगिन विवरण भरें: रजिस्ट्रेशन संख्या, जन्मतिथि और पासवर्ड दर्ज करें। दिखाए गए कैप्चा कोड को भरें और ‘सबमिट’ पर क्लिक करें। आवेदन की स्थिति जांचें: लॉगिन करने के बाद, डैशबोर्ड पर ‘आवेदन की स्थिति’ (Application Status) या ‘वर्तमान स्थिति जांचें’ (Check Current Status) विकल्प पर क्लिक करें। यहां आप अपने आवेदन की वर्तमान स्थिति देख सकते हैं। यदि आपको लॉगिन करने में कठिनाई हो रही है या पासवर्ड भूल गए हैं, तो ‘पासवर्ड भूल गए’ (Forgot Password) विकल्प का उपयोग करके नया पासवर्ड बना सकते हैं। Uttar Pradesh Scholarship Helpline Number उत्तर प्रदेश में विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध हैं: सामान्य छात्रवृत्ति सहायता: 0522-353 8700 (हेल्पलाइन नंबर) और 0522-228 6150 (संपर्क सहायता) पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग: टोल-फ्री नंबर 1800 180 5131 अल्पसंख्यक कल्याण विभाग: टोल-फ्री नंबर 1800 180 5229 सामाजिक कल्याण विभाग: टोल-फ्री नंबर 14568 (समाज कल्याण कमांड सेंटर) अधिक जानकारी के लिए, आप संबंधित विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों पर भी जा सकते हैं। अधिक जानकारी और नवीनतम अपडेट के लिए उत्तर प्रदेश छात्रवृत्ति की आधिकारिक वेबसाइट scholarship.up.gov.in पर नियमित रूप से जाएं।
Uttar Pradesh Free Pre-Examination Training Centers Yojna
UP Free Pre-Examination Training Centers Yojana- उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य राज्य के आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों (जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग सुविधा प्रदान करना है। 🔷 योजना की मुख्य विशेषताएं: लाभार्थी वर्ग: अनुसूचित जाति (SC) अनुसूचित जनजाति (ST) अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) अल्पसंख्यक आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) उद्देश्य: कमजोर वर्गों के प्रतिभाशाली छात्रों को सिविल सेवा, बैंक, रेलवे, SSC, पुलिस, PCS, UPSC आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण नि:शुल्क कोचिंग प्रदान करना। प्रशिक्षण केंद्र: उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें योग्य शिक्षकों के द्वारा नियमित कक्षाएं चलाई जाती हैं। कोर्स की अवधि: कोचिंग आमतौर पर 3 से 6 महीने की होती है। सुविधाएं: नि:शुल्क कोचिंग अध्ययन सामग्री कुछ केंद्रों में छात्रावास/आवास की सुविधा भी आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन संभव है। पात्रता के आधार पर मेरिट लिस्ट बनती है और चयनित छात्रों को कोचिंग में प्रवेश मिलता है। पात्रता: उत्तर प्रदेश का निवासी होना आवश्यक। न्यूनतम शैक्षिक योग्यता संबंधित परीक्षा के अनुसार। आय सीमा सामान्यतः ₹2.5 लाख से ₹4 लाख वार्षिक तक (वर्ग के अनुसार अलग-अलग)। ✅ योजना का लाभ क्यों लें? यदि आप आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं लेकिन आपके पास प्रतिभा है और आप IAS, PCS, Banking या अन्य सरकारी नौकरी की तैयारी करना चाहते हैं, तो यह योजना आपके लिए वरदान साबित हो सकती है। अगर आप चाहें, तो मैं आपको आवेदन प्रक्रिया का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका या आपके जिले में स्थित प्रशिक्षण केंद्रों की जानकारी भी दे सकता हूँ। बताइए, आपको किस प्रकार की सहायता चाहिए? Uttar Pradesh Pre-Examination Training Centers Online Process 🔷 ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया (Step-by-Step in Hindi): 🖥️ चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले उत्तर प्रदेश सामाजिक कल्याण विभाग (Social Welfare Department, UP) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। 👉 http://socialwelfareup.upsdc.gov.in 📝 चरण 2: योजना अनुभाग में जाएं वेबसाइट पर “पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र योजना” (Pre-Examination Training Scheme) या “योजनाएं” सेक्शन को खोलें। वहां “ऑनलाइन आवेदन करें” (Apply Online) का लिंक मिलेगा, उस पर क्लिक करें। 🧾 चरण 3: पंजीकरण (Registration) यदि आप पहली बार आवेदन कर रहे हैं, तो नया पंजीकरण करें (New Registration) पर क्लिक करें। अपना आधार नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आदि भरें। OTP के माध्यम से सत्यापन करें और पंजीकरण पूरा करें। 🧑💻 चरण 4: लॉगिन करें पंजीकरण के बाद, यूजर आईडी और पासवर्ड से लॉगिन करें। 📄 चरण 5: आवेदन फॉर्म भरें अब ऑनलाइन आवेदन फॉर्म खोलें। मांगी गई सभी जानकारी भरें जैसे: व्यक्तिगत विवरण (नाम, पता, मोबाइल आदि) शैक्षिक योग्यता आय प्रमाण पत्र जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर स्कैन करके अपलोड करें। 📤 चरण 6: दस्तावेज़ अपलोड करें जरूरी दस्तावेजों की स्कैन्ड कॉपी अपलोड करें: आधार कार्ड शैक्षणिक प्रमाण पत्र जाति प्रमाण पत्र निवास प्रमाण पत्र आय प्रमाण पत्र फोटो और सिग्नेचर ✅ चरण 7: फाइनल सबमिशन करें फॉर्म को ध्यान से चेक करें और फिर सबमिट कर दें। सबमिशन के बाद एक पावती रसीद (Acknowledgment) या आवेदन संख्या प्राप्त होगी — इसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखें। 📌 महत्वपूर्ण सुझाव: सभी जानकारी सही और सत्य प्रमाणों पर आधारित होनी चाहिए। समय-समय पर वेबसाइट चेक करते रहें – चयन सूची, परीक्षा तिथि या इंटरव्यू कॉल आदि की सूचना वहीं दी जाती है। चयन मेरिट और पात्रता के आधार पर होता है।
पारिवारिक लाभ योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना क्या है? National Family Benefit Scheme- राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना एक सरकारी योजना है जो गरीबी रेखा के नीचे (BPL) जीवन यापन कर रहे परिवारों को उनके मुखिया की मृत्यु के बाद आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इस योजना का उद्देश्य मृतक के आश्रितों को जीवन-यापन में मदद देना है। पारिवारिक लाभ योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज (National Family Benefit Scheme- Required Documents): मृत्यु प्रमाण पत्र (CRS पोर्टल से सत्यापित) आय प्रमाण पत्र (तहसील द्वारा निर्गत) आधार सीडेड बैंक खाता विवरण (IFSC कोड सहित) वोटर आईडी कार्ड राशन कार्ड आधार कार्ड फोटोग्राफ फोटो/अंगूठे का निशान (स्कैन कॉपी) मोबाइल नंबर 💰 उत्तर प्रदेश में मृत्यु होने पर परिवार को कितनी राशि मिलती है? यदि परिवार योजना के योग्य है, तो उसे ₹30,000 की एकमुश्त सहायता राशि दी जाती है। पारिवारिक लाभ योजना के लिए पात्रता: National Family Benefit Scheme-Eligibility आयु: कमाऊ मुखिया की आयु मृत्यु के समय 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए। लिंग: महिला, पुरुष या ट्रांसजेंडर। वर्ग: अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य या अल्पसंख्यक। वार्षिक आय: ग्रामीण क्षेत्र में ₹46,080 तक और शहरी क्षेत्र में ₹56,460 तक। मूल निवास: आवेदक उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना चाहिए। विशेष मानदंड: मृत्यु की तिथि के एक वर्ष के भीतर आवेदन करना अनिवार्य पारिवारिक लाभ की स्थिति (Status) कैसे जांचें: उत्तर प्रदेश सामाजिक कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। “Application Status” या “आवेदन की स्थिति” पर क्लिक करें। आवेदन संख्या (Application ID) या पंजीकरण संख्या दर्ज करें। स्थिति स्क्रीन पर दिखाई देगी। अधिक जानकारी के लिए, आप समाज कल्याण विभाग की हेल्पलाइन नंबर 14568 पर संपर्क कर सकते हैं। 📝 पारिवारिक लाभ योजना के लिए (National Family Benefit Scheme) ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? 🌐 स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले उत्तर प्रदेश समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट खोलें: 🔗 http://nfbs.upsdc.gov.in 🔐 स्टेप 2: रजिस्ट्रेशन करें वेबसाइट पर “नया पंजीकरण (New Registration)” का विकल्प चुनें। मांगी गई जानकारी भरें: मृतक व्यक्ति का नाम मृत्यु की तिथि आवेदक का नाम और आधार नंबर जिला, तहसील और ग्राम पंचायत/नगर निकाय मोबाइल नंबर 📤 स्टेप 3: दस्तावेज़ अपलोड करें आवेदन फॉर्म भरने के बाद निम्नलिखित दस्तावेज अपलोड करें: आवश्यक दस्तावेज़ विवरण ✅ मृत्यु प्रमाण पत्र नगर निगम या पंचायत से प्राप्त ✅ आधार कार्ड मृतक और आवेदक दोनों का ✅ बैंक पासबुक की कॉपी आवेदक के नाम से ✅ बीपीएल कार्ड गरीबी रेखा से नीचे होने का प्रमाण ✅ पासपोर्ट साइज फोटो आवेदक की 📥 स्टेप 4: आवेदन सबमिट करें सभी जानकारी जांच लें और फिर “सबमिट (Submit)” बटन पर क्लिक करें। सफलतापूर्वक सबमिट होने पर आपको एक पंजीकरण संख्या (Application Number) प्राप्त होगी – इसे सुरक्षित रखें। 🔍 स्टेप 5: आवेदन की स्थिति जांचें (Status Check) वेबसाइट के होमपेज पर जाएं। “आवेदन की स्थिति / Application Status” पर क्लिक करें। अपनी पंजीकरण संख्या दर्ज करें और सबमिट करें। आपकी आवेदन की स्थिति स्क्रीन पर दिखाई देगी। 🧾 जरूरी बातें: आवेदन केवल मृतक की मृत्यु के 1 वर्ष के भीतर किया जाना चाहिए। लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे ₹30,000 की राशि भेजी जाती है। केवल एक बार ही यह लाभ दिया जाता है। अगर आप चाहें तो हमारा सीएससी सेंटर आपको ऑनलाइन फॉर्म भरने में मदद कर सकता है?
Hostinger क्या है? Hostinger से होस्टिंग खरीदने के लाभ?
Hostinger क्या है? Hostinger एक वेब होस्टिंग कंपनी है, जिसकी स्थापना 2004 में लिथुआनिया में हुई थी। यह विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त वेब होस्टिंग प्रदाता है, जो 150 से अधिक देशों में 30 लाख से अधिक लोगों को सेवाएँ प्रदान करता है। Hostinger से डोमेन कैसे खरीदें Hostinger की वेबसाइट पर जाएं: अपने ब्राउज़र में hi.hostinger.in खोलें। डोमेन नाम खोजें: मुख्य पृष्ठ पर उपलब्ध डोमेन सर्च बार में अपनी पसंद का डोमेन नाम दर्ज करें और उपलब्धता जांचें। डोमेन का चयन करें: यदि आपका चुना हुआ डोमेन उपलब्ध है, तो उसे कार्ट में जोड़ें। खरीदारी पूरी करें: कार्ट में जाकर भुगतान प्रक्रिया पूरी करें और आवश्यक विवरण भरें। Hostinger से होस्टिंग खरीदने के लाभ: 1. तेज़ और विश्वसनीय सर्वर: Hostinger के सर्वर तेज़ गति और उच्च अपटाइम प्रदान करते हैं, जिससे आपकी वेबसाइट सुचारु रूप से चलती है। 2. उपयोगकर्ता-मित्रपूर्ण इंटरफ़ेस: इनका hPanel नियंत्रण पैनल उपयोग में सरल है, जिससे वेबसाइट प्रबंधन आसान हो जाता है।Wikipedia+1Hostinger+1 3. किफायती मूल्य: Hostinger बजट-अनुकूल योजनाएँ प्रदान करता है, जो विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार उपयुक्त हैं। 4. 24/7 ग्राहक सहायता: किसी भी समस्या या प्रश्न के लिए, उनकी ग्राहक सहायता टीम चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है। Hostinger Customer Care Number Hostinger मुख्य रूप से लाइव चैट और ईमेल के माध्यम से ग्राहक सहायता प्रदान करता है। उनकी वेबसाइट पर “संपर्क करें” या “सहायता केंद्र” अनुभाग में जाकर आप सहायता प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में, उनका कोई सार्वजनिक टेलीफोन समर्थन नंबर उपलब्ध नहीं है। अधिक जानकारी और मार्गदर्शन के लिए, आप नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं: